खबर

भारत में सम्मान दिए नहीं बांटे और लिए जाते है_ भाग 5

धारा 370 हटाई जा सकती है तो डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत रत्न क्यों नहीं कहला सकते

भारत में सम्मान दिए नहीं बांटे और लिए जाते है_ भाग 5

धारा 370 हटाई जा सकती है तो डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत रत्न क्यों नहीं कहला सकते

जहां बलिदान हुए मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है _दो प्रधान , दो निशान _दो विधान नहीं चलेंगे नहीं चलेंगे का नारा बुलंद कर सत्ता में आए और सत्ता पर काबिज हो दो प्रधान ,दो निशान, दो विधान समाप्त भी कर दिए यह भी बतला दिया कि जहां बलिदान हुए मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है, लेकिन डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत रत्न नहीं हुए। क्यों?

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिनके दीपक की जलाई लौ के प्रकाश में, त्याग और बलिदान ने एक संगठन को फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया, जिनके बलिदान से वह संगठन सत्ता पर काबिज हो गया, आज वे ही डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी अब तक इस देश में भारत रत्न नहीं हो पाएं? कश्मीर नीति पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू से ठनी तो मिनटों में नहीं सेकंडों में नेहरू कैबिनेट से त्यागपत्र देकर बाहर हो गए और कश्मीर के दो प्रधान दो निशान दो विधान के कानून को समाप्त करने के आंदोलन को लेकर देश की सड़कों पर उतर गए, एक कोने में अपने कुछ साथियों के साथ दीपक की टिमटिमाती रोशनी में जनसंघ की स्थापना कर कश्मीर नीति के विरोध के सम्पूर्ण देश में अलख जगाने लगे, आंदोलन के ही दौरान कश्मीर में गिरफ्तार किए जाने के बाद शेख अब्दुल्ला की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने प्राणों का बलिदान कर दिया, कहा जाता है वह मौत नहीं हत्या थी ।
विडंबना देखिए कश्मीर नीति पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जिन जवाहर लाल नेहरू से अनबन हुई वे देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने और भारत रत्न , दूसरी ओर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम को लेकर जिन्होंने सत्ता प्राप्त की, उस संगठन के दो दो नेता प्रधानमंत्री और उपप्रधानमंत्री बन गए और भारत रत्न भी बन गए, लेकिन डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत रत्न नहीं कहला सके। यह कैसा न्याय है? जिनसे अनबन हुई वे भी सब कुछ पा गए, जिन्होंने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रज्वलित दीपक की लौ बुझाकर कमल खिलाकर सत्ता पा ली और भारत रत्न सब कुछ पा लिया ,वही डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपने ही प्रज्वलित दीपक की लौ अपनो ने ही बुझाकर अंधकार में कही भूला दिया ,आज तक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत रत्न नहीं कहला पाएं,जब सत्ता में विरोधी थे तब तो डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत रत्न बनना नामुमकिन ही था , लेकिन जब कहने के लिए अपने आए तो दूसरे सम्मानों के लिए दिखाई देने लगे लेकिन डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारत रत्न देने के लिए भूला दिया गया। करोड़ों कार्यकर्ताओं का यह कैसा संगठन जिसमें से कोई भी नहीं जो डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम को भारत रत्न के लिए आगे बढ़ा देता, जिस दिन धारा 370 को हटाया था, उसी दिन डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारत रत्न घोषित कर देना था, लेकिन क्या बताएं पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं थे कैसे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारत रत्न घोषित कर देते! भारत रत्न मिलने के लिए आज की तारीख में एक आवश्यक शर्त है कि संबंधित राज्य में चुनाव होना आवश्यक है, ताकि हम आंखों में आंसू छलकाते हुए घोषित भारत रत्न व्यक्ति को याद कर पाएं , जेब से रुमाल निकालकर आंसू पोछते दिख सके।
अब डॉक्टर श्यामा मुखर्जी को भारत रत्न मिल सकता हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल में चुनाव होने है, आंसू छलकने के लिए सही समय है, यदि ऐसा होगा तो डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान व्यर्थ हो जायेगा क्योंकि डॉक्टर मुखर्जी ने अपनी राजनीति चुनावों के लिए कभी नहीं की, वे केवल राष्ट्र के लिए जिए और राष्ट्र के लिए ही मरे,भारत के मुकुट मणि को बचाने के लिए वे बलिदानी हुए , वे भारत मां को परम वैभव पर पहुंचाने के लिए शहीद हुए , कितना श्रेष्ठ होता की देश के गणतंत्र दिवस पर डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत रत्न घोषित कर दिए जाते जिन्होंने देश के दो संविधान को समाप्त करने के लिए अपना बलिदान कर दिया , लेकिन 77 गणतंत्र दिवस निकल गए इस देश की सरकारों को , अपनो को डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी याद नहीं आए कि वे भी भारत रत्न कहला सकते। पुण्य तिथि, जयंती पर आदरांजलि श्रद्धांजलि सब अर्पित करेंगे बस डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारत रत्न नहीं कहेंगे
जिन्होंने कश्मीर पर दोगली नीति बनाई वे भारत रत्न के हकदार हो गए, जिन्होंने कश्मीर पर लंबे चौड़े केवल भाषण दिए वे भारत रत्न के हकदार हो गए और जिस व्यक्ति ने कश्मीर पर अपने प्राणों का बलिदान कर दिया ,वह व्यक्ति भारत रत्न का हकदार नहीं हो सका, क्योंकि इस देश में सम्मान दिए नहीं बांटे और लिए जाते है ऐसे में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी कैसे सम्मान पा सकते हैं___________________
इस देश में सम्मान दिए नहीं बांटे और लिए जाते है शृंखला निरन्तर जारी_____________________
*नोट_जिन्हें सम्मान बांटे गए हैं , उनके प्रति हमारा पूरा सम्मान है क्योंकि विश्लेषण आंकलन गहराई से करके ही सरकार इन सम्मानों की घोषणा करती हैं।बस प्रश्न इतना सा है जो उसके और भी हकदार है , उनके साथ अन्याय न हो।*
हेमंत चंद्र दुबे बबलू बैतूल

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button