हाईकोर्ट ने आरोपी की उम्रकैद की सजा घटाकर तीन वर्ष की
सेशन कोर्ट ने बिना कानून का समुचित मूल्यांकन किए आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी
हाईकोर्ट ने आरोपी की उम्रकैद की सजा घटाकर तीन वर्ष की
सेशन कोर्ट ने बिना कानून का समुचित मूल्यांकन किए आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी

बैतूल। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक अग्रवाल एवं जस्टिस ए.के. सिंह की युगलपीठ ने बैतूल जिले के मुलताई में दर्ज एक बहुचर्चित प्रकरण में सेशन कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को घटाकर तीन वर्ष कर दिया है।
यह मामला आरोपी पर अपनी नाबालिग चचेरी बहन से दुष्कर्म के आरोप से संबंधित था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सेशन कोर्ट ने बिना कानून का समुचित मूल्यांकन किए आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पुलिस अनुसंधान में भी गंभीर खामियां पाई गईं। कोर्ट ने पाया कि अपराध दर्ज करने के दौरान पुलिस ने स्लाइड आदि तैयार करने जैसी मूलभूत प्रक्रिया का पालन नहीं किया और जांच में गंभीर त्रुटियां कीं।
इसी वजह से आरोपी के विरुद्ध ऐसी धारा में अपराध पंजीबद्ध हुआ, जिसमें उम्रकैद का प्रावधान है, जबकि इस मामले में अधिकतम तीन वर्ष तक के कारावास की सजा ही दी जा सकती थी।
इस आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी की उम्रकैद की सजा घटाकर तीन वर्ष कर दी।
मामले में युवा अधिवक्ता इरफ़ान खान ने जबलपुर हाई कोर्ट में सफल पैरवी करते हुए अपने मुवाक्कील कों राहत दिलाई हैं, जिसकी चर्चा हो रही हैं.
📌 यह फैसला महत्वपूर्ण इसलिए – कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों में गंभीरता से अनुसंधान करना चाहिए ताकि निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक कठोर सजा न भुगतनी पड़े।