उमरा के लिए रवाना हुए इसराइल शाह, परिवार एवं सामाजिक बंधुओं नें स्वागत कर दी बिदाई।
जामा मस्जिद चौक पर कांग्रेस नेता समीर खान ने किया इस्तकबाल।
उमरा के लिए रवाना हुए इसराइल शाह, परिवार एवं सामाजिक बंधुओं नें स्वागत कर दी बिदाई।
जामा मस्जिद चौक पर कांग्रेस नेता समीर खान ने किया इस्तकबाल।

बैतूल। कोठी बाजार बस स्टैंड पर हम्माली का कार्य करने वाले इसराइल शाह एवं उनका परिवार उमरा करने गए जिनका वार्ड वासियों एवं कांग्रेस के नेता समीर खान एवं साथियों ने फूल माला पहनकर जामा मस्जिद चौक पर इस्तकबाल किया।
उमरा, इस्लाम में एक तीर्थयात्रा है जो मुसलमानों द्वारा मक्का में की जाती है। इसे “छोटा हज” भी कहा जाता है, और यह हज से अलग है, जो मुसलमानों के लिए अनिवार्य है। उमरा किसी भी समय किया जा सकता है, जबकि हज एक विशिष्ट समय पर किया जाता है।
*उमरा का अर्थ और महत्व:*
उमरा का शाब्दिक अर्थ है “आबादी वाले स्थान पर जाना”.
इस्लाम में, उमरा का अर्थ है मक्का की यात्रा करना और पवित्र काबा के चारों ओर तवाफ़ करना (घूमना) और सफा और मरवा के बीच सई करना।
यह एक आध्यात्मिक यात्रा है जिसका उद्देश्य अल्लाह के करीब होना, पापों से मुक्ति पाना और आत्म-शुद्धि करना है।
*उमरा की रस्में:*
उमरा करने के लिए, मुसलमानों को इहराम नामक विशेष वस्त्र पहनना होता है।
इसके बाद, वे काबा के चारों ओर तवाफ़ करते हैं, जो सात बार घूमना होता है। फिर, वे सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच सात बार चलते हैं (सई)। अंत में, वे अपने बाल कटवाते हैं या मुंडवाते हैं।
*उमरा और हज में अंतर:*
उमरा वर्ष के किसी भी समय किया जा सकता है, जबकि हज एक विशिष्ट समय पर किया जाता है।
हज मुसलमानों के लिए अनिवार्य है, जबकि उमरा स्वैच्छिक है, लेकिन अत्यधिक अनुशंसित है।
उमरा में हज की तुलना में कम रस्में शामिल हैं।
उमरा एक आध्यात्मिक यात्रा है जो मुसलमानों को अल्लाह के करीब लाती है। यह पापों से मुक्ति पाने और आत्म-शुद्धि का एक तरीका है। यह इनाम और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक अवसर है। उमरा व्यक्ति को धैर्य, समर्पण और विश्वास जैसे गुणों को विकसित करने में मदद करता है।
जिला ब्यूरो नईम मामू की खास रिपोर्ट